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Lectionary Theme: Annunciation to Joseph, Joseph: the Model of discipleship for the People of God
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Isaiah 7:10-17 First Lesson
10. यहोवा ने आहाज से अपनी बात जारी रखते हुए कहा,
11. यहोवा बोला, “ये बातें सच्ची हैं, इसे स्वयं प्रमाणित करने के लिए कोई संकेत माँग ले। तू जैसा भी चाहे वैसा संकेत माँग सकता है। वह संकेत चाहे गहरे मृत्यु के प्रदेश से हो और चाहे आकाश से भी ऊँचे किसी स्थान से।”
12. किन्तु आहाज़ ने कहा, “प्रमाण के रूप में मैं कोई संकेत नहीं मागूँगा। मैं यहोवा की परीक्षा नहीं लूँगा।”
13. तब यशायाह ने कहा, “हे, दाऊद के वंशजों, सावधान हो कर सुनो! तुम लोगों के धैर्य की परीक्षा लेते हो। क्या यह तुम्हारे लिए काफी नहीं है जो, अब तुम मेरे परमेश्वर के धैर्य की परीक्षा ले रहे हो
14. किन्तु, मेरा स्वामी परमेश्वर तुम्हें एक संकेत दिखायेगा: “देखो, एक कुवाँरी गर्भवती होगी और वह एक पुत्र को जन्म देगी। वह इस पुत्र का नाम इम्मानुएल रखेगी।
15. इम्मानुएल दही और शहद खायेगा। वह इसी तरह रहेगा जब तक वह यह नहीं सीख जाता उत्तम को चुनना और बुरे को नकारना।
16. किन्तु जब तक वह भले का चुनना और बुरे का त्यागना जानेगा एप्रैम और अराम की धरती उजाड़ हो जायेगी। आज तुम उन दो राजाओं से डर रहे हो।
17. “किन्तु तुम्हें यहोवा से डरना चाहिये। क्यों क्योंकि यहोवा तुम पर विपत्ति का समय लाने वाला है। वे विपत्तियाँ तुम्हारे लोगों पर और तुम्हारे पिता के परिवार के लोगों पर आयेंगी। विपत्ति का यह समय उन सभी बातों में अधिक बुरा होगा जो जब से एप्रैम (इस्राएल) यहूदा से अलग हुआ है, तब से अब तक घटी है। इसके लिये परमेश्वर क्या करेगा परमेश्वर अश्शूर के राजा को तुम से लड़ाने के लिये लायेगा।
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1 Thessalonians 5:12-22 Second Lesson
12. हे भाइयों, हमारा तुमसे निवेदन है कि जो लोग तुम्हारे बीच परिश्रम कर रहे हैं और प्रभु में जो तुम्हें राह दिखाते हैं, उनका आदर करते रहो।
13. हमारा तुमसे निवेदन है कि उनके काम के कारण प्रेम के साथ उन्हें पूरा आदर देते रहो। परस्पर शांति से रहो।
14. हे भाईयों, हमारा तुमसे निवेदन है आलसियों को चेताओ, डरपोकों को प्रोत्साहित करो, दोनों की सहायता में रुचि लो, सब के साथ धीरज रखो।
15. देखते रहो कोई बुराई का बदला बुराई से न दे, बल्कि सब लोग सदा एक दूसरे के साथ भलाई करने का ही जतन करें।
16. सदा प्रसन्न रहो।
17. प्रार्थना करना कभी न छोड़ो।
18. हर परिस्थिति में परमेश्वर का धन्यवाद करो।
19. पवित्र आत्मा के कार्य का दमन मत करते रहो।
20. नबियों के संदेशों को कभी छोटा मत जानो।
21. हर बात की असलियत को परखो, जो उत्तम है, उसे ग्रहण किए रहो
22. और हर प्रकार की बुराई से बचे रहो।
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2 Peter 1:5-11 Epistle
5. सो इसलिए अपने विश्वास में उत्तम गुणों को, उत्तम गुणों में ज्ञान को,
6. ज्ञान में आत्मसंयम को, आत्मसंयम में धैर्य को, धैर्य में परमेश्वर की भक्ति को,
7. भक्ति में भाईचारे को और भाईचारे में प्रेम को उदारता के साथ बढ़ाते चलो।
8. क्योंकि यदि ये गुण तुममें हैं और उनका विकास हो रहा है तो वे तुम्हें कर्मशील और सफल बना देंगे तथा उनसे तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह का परिपूर्ण ज्ञान प्राप्त होगा
9. किन्तु जिसमें ये गुण नहीं हैं, उसमें दूर-दृष्टि नहीं है, वह अन्धा है। तथा वह यह भूल चुका है कि उसके पूर्व पापों को धोया जा चुका है।
10. इसलिए हे भाइयो, यह दिखाने के लिए और अधिक तत्पर रहो कि तुम्हें वास्तव में परमेश्वर द्वारा बुलाया गया है और चुना गया है क्योंकि यदि तुम इन बातों को करते हो तो न कभी ठोकर खाओगे और न ही गिरोगे,
11. और इस प्रकार हमारे प्रभु एवम् उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्त राज्य में तुम्हें प्रवेश देकर परमेश्वर अपनी उदारता दिखायेगा।
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Matthew 1:18-23 Gospel
18. यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार हुआ: जब उसकी माता मरियम की यूसुफ के साथ सगाई हुई तो विवाह होने से पहले ही पता चला कि (वह पवित्र आत्मा की शक्ति से गर्भवती है।)
19. किन्तु उसका भावी पति यूसुफ एक अच्छा व्यक्ति था और इसे प्रकट करके लोगों में उसे बदनाम करना नहीं चाहता था। इसलिये उसने निश्चय किया कि चुपके से वह सगाई तोड़ दे।
20. किन्तु जब वह इस बारे में सोच ही रहा था, सपने में उसके सामने प्रभु के दूत ने प्रकट होकर उससे कहा, “ओ! दाऊद के पुत्र यूसुफ, मरियम को पत्नी बनाने से मत डर क्य़ोंकि जो बच्चा उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है।
21. वह एक पुत्र को जन्म देगी। तू उसका नाम यीशु रखना क्य़ोंकि वह अपने लोगों को उनके पापों से उद्धार करेगा।”
22. यह सब कुछ इसलिये हुआ है कि प्रभु ने भविष्यवक्ता द्वारा जो कुछ कहा था, पूरा हो:
23. “सुनो, एक कुँवारी कन्या गर्भवती होकर एक पुत्र को जन्म देगी। उसका नाम इम्मानुएल रखा जायेगा।” (जिसका अर्थ है “परमेश्वर हमारे साथ है।”)